शनिवार, 1 जनवरी 2011

नव वर्ष 2012 मंगल मय हो




  मंगल हो नव वर्ष  आपका,
सुखी रहे  परिवार   आपका.
स्वस्थ्य      रहे  संतृप्त   रहे,
और  भरा रहे भंडार आपका,

पायें वो सब, सोचा हो जो कुछ,
सपना     हो     साकार    आपका.
सफल बने हर क्षेत्र में  निशदिन,
   बने सानंद     स्वभाव     आपका . 
प्रतिदिन   प्रति पल सोचें मंगल,
उन्नत    हो       परमार्थ    आपका.

  मंगल हो नव वर्ष  आपका .
  मंगल हो नव वर्ष  आपका ..
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रविवार, 17 अक्टूबर 2010

दुर्गा पूजा एवं विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनायें

सर्व बाधा विनिर्मुक्तो धनधान्य सुतान्विता .
मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न    संशया ..

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         -  शिव प्रकाश मिश्र
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क्षणिकाएं

(१)

प्रेम में     तुम्हारे है
यही मुझसे से अन्तर,
तुम  देखते हो   बाहर
मै देखता  हूँ अन्दर ..


(२)

एक बस कंडेक्टर ने
टिकेट बनाने में किया
 नया तरीका अख्तियार,
फर्स्ट ऐड बॉक्स पर
लिख दिया
" बिना टिकेट यात्री होशियार".


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-  शिव प्रकाश मिश्र
-    S.P.MISHRA
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गुरुवार, 7 अक्टूबर 2010

सपना....The Dream

रात्रि  सपने में जो देखा था,
वही रंग फिर उभर आया .
खामोशियों में गुनगुनाहट भर गयी,
दिल में ही दर्पण सा नजर आया.
पवन के मात्र लघु झोंके से ,
सुगंधों का बड़ा तूफ़ान आया.
सौंदर्य मणि की रश्मिया ऐसी कि,
चित्रकारों की तूलिका पर तरस आया,
मुग्ध हो ज्यों भानु ने  देखा ,
धरा को नाचते पाया......
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-   शिव प्रकाश मिश्र
-    S.P.MISHRA

शनिवार, 2 अक्टूबर 2010

ऋतुराज बसंत ( मधुमास )

अरे तुम फिर आ गयी ऋतुराज,
                            बहाती सुंदर सुरभि सुवास,
बिखेरा कैसा ये उन्माद,
                         लगाती हो मुझसे कुछ आश,
ओट में सुन्दरता के हो,
                             बुना है कैसा दुर्गम जाल,
फंस गए सब ही अपने आप,
                             टेक तेरे घुटुनो पर भाल,
रुचेगी  कैसे सुन्दरता,
                          रिस रहे जिसके घाव हरे
हो रहा हो काँटों से प्यार ,
                             उसे क्या गंध सुगंध करे,
चाहिए नहीं मुझे सुख चारू,
                           अगर हो निर्जन कोई ठौर,
रहूँगा भी कैसे मैं वहां
                           जहाँ हो मानवता ही गौड़,
बुझी हो आंसू से जो प्यास
                        न आएगा उसको मधु रास,
लगा दो अपना सारा जोर,
                      न होगा मुझको अब विश्वाश.

###########     शिव प्रकाश मिश्र    ###########

(मूल कृति दिसम्बर १९७९ - सर्व प्रथम दैनिक वीर हनुमान औरैय्या में प्रकाशित)

रविवार, 26 सितंबर 2010

पतझड़ का पेड़

मैं पतझड़ का पेड़ हूँ,
छाया और हरित विहीन,
अपने आप टूट रहा हूँ,
अनगिनत आशाएं
फूली फली कभी,
और अनगिनत बहारों में,
आये कितने ही फूल और  फल,
मोहक आकर्षण में ,
कितने ही पंथियों का था,
मै आश्रय स्थल,
बहारों के साथ,
काफिला खिसक गया,
प्यार और अपनापन,
छूमंतर हो गया,
और अब है
यहाँ वीरान,
मरघट सा सुनसान
शायद
फिर कोई आये
अपना हाथ बढाये
प्रेम का दिया जलाये
 और
मेरे  सूखेपन का श्राप
फलित हो जाये,
इस आशा में,
थोडा सा ही सही
जमीन से जुड़ा हूँ मै,
और
प्रतीक्षा में
सूखा ही सही
न जाने कब से,
खड़ा हूँ मै.
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  - शिव प्रकाश मिश्र
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शनिवार, 11 सितंबर 2010

कौन हूँ मैं

कौन हूँ मैं, कहाँ से गुजरता रहा ?
आज पूंछो अभी तक क्या करता रहा ?


एक चाहत लिए दावं रखता रहा ,
शह उनकी पे ही मात खाता रहा.
हार कर मैंने खोया नहीं हौसला,
जीत की हार होना नहीं फैसला.
आज ऐसा नवी बन गया अजनवी,
रोज़ जिसको हृदय में बिठाता रहा.
आज पूंछो अभी तक क्या करता रहा ?.......




एक पागल पथिक सा फिर दर बदर,
कितनी मंजिल चली कुछ नहीं है खबर,
ताक पर आश सपने सजाता भी क्या ?
नीर पलको पे आँखें चुराता न क्या ?
आज ऐसी कहानी नहीं कह सका ,
शब्द जिसके लिए दूड़ता फिर रहा.
आज पूंछो अभी तक क्या करता रहा ?.......
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        - शिव प्रकाश मिश्र
           shiv prakash mishra
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देश में वह शुरू हो गया, जो १५ वर्ष बाद होना था

भारत का राष्ट्रान्तरण: देश में वह शुरू हो गया, जो १५ वर्ष बाद होना था || विकसित भारत या विकसित इस्लामिक राष्ट्र? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ल...