गुरुवार, 9 जून 2016

और उड़ता पंजाब बन गई उड़ता विवाद



अनुराग कश्यप की फिल्म उड़ता पंजाब गहरे विवादों में आ गई है और यह पता चलने के बाद कि इस फिल्म को बनाने में आम आदमी पार्टी ने  आर्थिक मदद की है  हड़कंप मच गया है.  मजेदार बात यह है की आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल  फिल्म के पक्ष में खुलकर उतरे लेकिन यह तथ्य सामने आने के बाद वह परिद्रश्य से  एकदम गायब हो गए और अब आम आदमी पार्टी का कोई भी नेता खुलकर इस फिल्म के समर्थन में नहीं आ रहा.

मेरे एक मित्र जो फिल्मी पत्रकार हैं ने बताया कि विवादों में आने वाली अनुराग कश्यप की यह पहली फिल्म नहीं है. इससे पहले 2003 में उनके द्वारा बनाई गई फिल्म “पांच” आज तक सिनेमाघरों का मुहं  नहीं देख पाई  है क्योंकि उस फिल्म में भी ड्रग्स, हिंसा जैसे कई पहलू थे जिन्हें सेंसर बोर्ड ने अनुमति देने लायक नहीं समझा. इसके बाद 1993  के मुम्बई दंगों पर आधारित एक फिल्म “ब्लैक फ्राइडे”  भी विवादों में आई और अनुराग कश्यप द्वारा 2 साल तक कोर्ट में मुकदमा लड़ने और  तमाम परिवर्तनों के बाद फिल्म को सेंसर बोर्ड की अनुमति मिली.

पहले से ही तैयार बैठे अनुराग कश्यप हैं ने सिने जगत के कई लोगों को अपने साथ खड़ा किया है और  वह प्रत्यक्ष रूप से फिल्म सेंसर बोर्ड और अप्रत्यक्ष रूप से केंद्र सरकार और पंजाब सरकार  के खिलाफ आ जायेंगे ये योजना वद्ध ढंग से होगा. जो लोग अनुराग कश्यप के साथ खड़े हैं उनमें से काफी बड़ी संख्या में वह लोग हैं जिन्होंने फिल्म एवं टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया में गजेंद्र सिंह की नियुक्ति  का विरोध किया था. जब भी कभी सेंसर बोर्ड किसी फिल्म में परिवर्तन करने की सलाह देता है या द्रश्यों  को काटता है तो यह निर्माताओं  को काफी नागवार गुजरता है क्योंकि ये ऐसे अंश होते हैं जो फिल्म के लिए पैसे कमाने का बहुत बड़ा स्रोत होते हैं.

कश्यप में हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है क्योंकि उन्होंने अपनी इस फिल्म को रिलीज करने के लिए 17 जून का समय निश्चित कर रखा था जो अब  मुश्किल लगता है. अच्छा हो यदि कोर्ट के बजाए फिल्म सेंसर बोर्ड और फिल्म बनाने वाले लोग आपस में बैठकर यह फैसला करें और उसके बाद फिल्म बनाने वाले लोग अगर इससे सहमत नहीं है तो उसके विरुद्ध अपील में जा सकते हैं, जो एक अच्छा कदम होगा. बहुत से फिल्म निर्माता अपनी फिल्मों में  सेंसर बोर्ड द्वारा दिए गए सुझाव पर  बहुत बड़े विवाद खड़ा करते हैं इसका एक कारण  फिल्म को अपेक्षित पब्लिसिटी दिलाना होता है. अगर वास्तव में निर्माता अपने विषय वस्तु के लिए इतना कमिटेड है और वह चाहते हैं कि उनके विषय वस्तु देश के लोग देखें तो उन्हें अपनी ऐसी सभी फिल्मों को इंटरनेट पर रिलीज कर देना चाहिए.

 अभी हाल में एक फिल्म “ मोहल्ला अस्सी घाट” गाली गलौज के अत्यधिक प्रयोग के कारण फिल्म सेंसर बोर्ड ने इसे अप्रूव नहीं किया और यह फिल्म आज तक रिलीज नहीं हो सकी. बाद में निर्माताओं ने इस फिल्म को इंटरनेट पर रिलीज कर दिया मैंने इस फिल्म को सिर्फ विवादों में आने के कारण  देखा और पाया कि अगर इस फिल्म से गालियां हटा दी जाए तो यह एक बेहतरीन  फिल्म है. लेकिन आज इसे आप फूहड़ और भद्दी गलियों के कारण अपनी पत्नी के साथ भी सहज रूप से नहीं देख सकते.  मोहल्ला अस्सी में  सनी देओल और एक से एक जाने माने कलाकार हैं जिनकी एक्टिंग बहुत ही बेहतरीन  है लेकिन क्या कारण है उन्होंने भी  भी गाली गलौज डायलॉग के रूप में इस्तेमाल की ? यहाँ तक कि  भगवान शंकर के मुहं से भी गली दिलवा दी . ये फिल्म  राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय पुरूस्कार जीत सकती थी जिससे वंचित रह गयी.

इस तरह की अपेक्षा नहीं की जानी चाहिए कि ऐसी फिल्मे आँख बंद कर पास होनी चाहिए .

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शुक्रवार, 13 मई 2016

बिहार का आगाज ........ क्या सचमुच आ गया आ गया जंगलराज....?

बारहवीं क्लास में पढ़ने वाले एक 19 वर्षीय छात्र आदित्य सचदेवा की बिहार में हत्या इसलिए की गयी क्योंकि उसने माफिया डॉन बिंदी यादव और सत्तारुढ़ दल की विधान परिषद सदस्य मनोरमा देवी के बेटे रॉकी यादव की कार को ओवरटेक करने की गुस्ताखी  की थी, जो अछम्य थी. शायद लोग सही कहते थे “ओवरटेक न करना बिहार में वरना गोली पड़ेगी कपार में ” इस घटना के बाद मेंरे एक मित्र ने अपनी मारुति कार  के पीछे लिख लिया है “जगह मिलने पर तुरन्त पास दिया जायेगा, कृपया गोली न मारें ”  आदित्य सचदेवा के परिजनों का करुण क्रंदन दिल को दहला देने वाला है और इसने  जन आक्रोश को जन्म दिया है किंतु सत्तारूढ़ दल इसे समझ नहीं सका है और, उप मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री सहित इसके  नेता  अनाप-शनाप और अनावश्यक बयान दे  रहे हैं जिससे न केवल सरकार की बल्कि समूचे बिहार की छवि खराब हो रही है और लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि  शायद जंगलराज का आगाज हो रहा है.  हो सकता है इसमें थोड़ी अतिश्योक्ति हो या राजनातिक विद्वेष की भावना हो. किन्तु  सत्तापक्ष के नेताओं द्वारा खासतौर से उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और वाज जले पर नमक छिड़कने जैसा है . यह सत्ता का अहंकार है और यह अंग्रेजों के जमाने की  उस मानसिकता से भी खराब है जिसमें भारतीय अंग्रेजों के बराबर खड़े नहीं हो सकते थे अंग्रेजों के साथ ट्रेन में यात्रा नहीं कर सकते थे और  सड़कों पर चल नहीं  सकते थे.

बिहार की वर्तमान सरकार में लालू प्रसाद यादव का राष्ट्रीय जनता दल सबसे बड़ी पार्टी है और इसके पास 80 विधायक हैं नीतीश कुमार जो मुख्यमंत्री हैं उनके पास केवल ७१  विधायक हैं और उनकी पार्टी दूसरे नंबर की पार्टी है. किसी भी गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी का प्रतिनिधि सरकार का मुखिया होता है किंतु चुनाव से पहले लालू यादव ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी पार्टी 80 सीटें प्राप्त कर बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनेगी.  शायद इसीलिए उन्होंने नीतीश कुमार को गठबंधन का नेता मानकर चुनाव प्रचार किया था और सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दी थी कि  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होंगे और उन्होंने ऐसा  किया भी.  लेकिन चुनाव के बाद  दोनों पार्टियों में एक अंदुरुनी सहमत बन गई थी कि जब तक लालू यादव का  बच्चा लोग ट्रेनिंग करेंगे तब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहेंगे और जैसे ही बच्चा लोगों की ट्रेनिंग पूरी हो जाएगी, नीतीश कुमार बड़े गठबंधन के  मुखिया बनकर प्रधानमंत्री पद की दावेदारी करेंगे. लालू प्रसाद यादव उन्हें समर्थन देंगे. हालाकि नितीश ने अपने लिए पार्टी के अध्यक्ष का पद पहले से ही शरद यादव से लेकर अपने पास रख लिया है . आप देखेंगे कि इस प्रकरण में अचानक उप मुख्यमंत्री और लालू के बेटे तेजस्वी यादव की भूमिका बहुत महत्व पूर्ण हो गयी है. उन्होंने सामने आकर कई बयान दिए और यह जताने की कोशिश की इस सरकार में दबदबा किस पार्टी का है इस पूरे प्रकरण में नितीश कुमार नेपथ्य में चले गए और बताया गया कि वह वाराणसी में, जो  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनाव क्षेत्र है वहां पर कोई रैली को संबोधित कर रहे हैं. हो सकता है किसी नैतिक आधार का सहारा लेकर स्तीफा भी दे दे लेकिन फिर सुशासन का क्या होगा ....?
शिव प्रकाश मिश्रा
लखनऊ ट्रिब्यून  http://lucknowtribune.blogspot.in ,
लखनऊ सेन्ट्रल  http://lucknowcentral.blogspot.in  तथा

हम हिन्दुस्तानी http://mishrasp.blogspot.in में एकसाथ प्रकाशित 

बिहार का आगाज ........ क्या सचमुच आ गया आ गया जंगलराज....?

बारहवीं क्लास में पढ़ने वाले एक 19 वर्षीय छात्र आदित्य सचदेवा की बिहार में हत्या इसलिए की गयी क्योंकि उसने माफिया डॉन बिंदी यादव और सत्तारुढ़ दल की विधान परिषद सदस्य मनोरमा देवी के बेटे रॉकी यादव की कार को ओवरटेक करने की गुस्ताखी  की थी, जो अछम्य थी. शायद लोग सही कहते थे “ओवरटेक न करना बिहार में वरना गोली पड़ेगी कपार में ” इस घटना के बाद मेंरे एक मित्र ने अपनी मारुति ८०० के पीछे लिख लिया है “जगह मिलने पर तुरन्त पास दिया जायेगा, कृपया गोली न मारें ”  आदित्य सचदेवा के परिजनों का करुण क्रंदन दिल को दहला देने वाला है और इसने  जन आक्रोश को जन्म दिया है किंतु सत्तारूढ़ दल इसे समझ नहीं सका है और, उप मुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री सहित इसके  नेता  अनाप-शनाप और अनावश्यक बयान दे  रहे हैं जिससे न केवल सरकार की बल्कि समूचे बिहार की छवि खराब हो रही है और लोगों ने कहना शुरू कर दिया है कि  शायद जंगलराज का आगाज हो रहा है.  हो सकता है इसमें थोड़ी अतिश्योक्ति हो या राजनातिक विद्वेष की भावना हो. किन्तु  सत्तापक्ष के नेताओं द्वारा खासतौर से उपमुख्यमंत्री और मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए बयान बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है और वाज जले पर नमक छिड़कने जैसा है . यह सत्ता का अहंकार है और यह अंग्रेजों के जमाने की  उस मानसिकता से भी खराब है जिसमें भारतीय अंग्रेजों के बराबर खड़े नहीं हो सकते थे अंग्रेजों के साथ ट्रेन में यात्रा नहीं कर सकते थे और  सड़कों पर चल नहीं  सकते थे.

बिहार की वर्तमान सरकार में लालू प्रसाद यादव का राष्ट्रीय जनता दल सबसे बड़ी पार्टी है और इसके पास 80 विधायक हैं नीतीश कुमार जो मुख्यमंत्री हैं उनके पास केवल ७१  विधायक हैं और उनकी पार्टी दूसरे नंबर की पार्टी है. किसी भी गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी का प्रतिनिधि सरकार का मुखिया होता है किंतु चुनाव से पहले लालू यादव ने सपने में भी नहीं सोचा होगा कि उनकी पार्टी 80 सीटें प्राप्त कर बिहार की सबसे बड़ी पार्टी बनेगी.  शायद इसीलिए उन्होंने नीतीश कुमार को गठबंधन का नेता मानकर चुनाव प्रचार किया था और सार्वजनिक रूप से घोषणा कर दी थी कि  मुख्यमंत्री नीतीश कुमार होंगे और उन्होंने ऐसा  किया भी.  लेकिन चुनाव के बाद  दोनों पार्टियों में एक अंदुरुनी सहमत बन गई थी कि जब तक लालू यादव का  बच्चा लोग ट्रेनिंग करेंगे तब तक नीतीश कुमार मुख्यमंत्री रहेंगे और जैसे ही बच्चा लोगों की ट्रेनिंग पूरी हो जाएगी, नीतीश कुमार बड़े गठबंधन के  मुखिया बनकर प्रधानमंत्री पद की दावेदारी करेंगे. लालू प्रसाद यादव उन्हें समर्थन देंगे. हालाकि नितीश ने अपने लिए पार्टी के अध्यक्ष का पद पहले से ही शरद यादव से लेकर अपने पास रख लिया है . आप देखेंगे कि इस प्रकरण में अचानक उप मुख्यमंत्री और लालू के बेटे तेजस्वी यादव की भूमिका बहुत महत्व पूर्ण हो गयी है. उन्होंने सामने आकर कई बयान दिए और यह जताने की कोशिश की इस सरकार में दबदबा किस पार्टी का है इस पूरे प्रकरण में नितीश कुमार नेपथ्य में चले गए और बताया गया कि वह वाराणसी में, जो  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चुनाव क्षेत्र है वहां पर कोई रैली को संबोधित कर रहे हैं. हो सकता है किसी नैतिक आधार का सहारा लेकर स्तीफा भी दे दे लेकिन फिर सुशासन का क्या होगा ....?

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शिव प्रकाश मिश्रा 

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शुक्रवार, 15 अप्रैल 2016

शाहरुख का फिर ऊल जलूल बयान


फिल्म स्टार शाहरुख खान ने इंडिया टीवी के प्रोग्राम जनता की अदालत”   के एक प्रोग्राम में, जिसका प्रसारण कल शनिवार को किया  जाना है,  रजत शर्मा के सवालों का जवाब देते हुए अपने पिछले असहिष्णुता के बयान पर बहुत सफाई दी. ये  कहना अप्रासंगिक नहीं होगा कि यह सफाई उनकी आगामी फिल्म फेनके रिलीज होने के उपलक्ष में की गई है. अपने परिवार के देशभक्त होने के दावे को मजबूत करते हुए और  अपनी स्थिति  साफ करते  करते उन्होंने एक बहुत लंबा, बेतुका और हास्यापद दावा कर दिया कि उनसे बड़ा देशभक्त हिंदुस्तान में कोई नहीं है.

हिंदुस्तान का सबसे बड़ा देशभक्त  होने का दावा इतना मूर्खतापूर्ण है के इससे उनकी मानसिक स्थित का पता चलता है. अपने दावे से उन्होंने  125 करोड़ की जनसंख्या वाले  हिंदुस्तान में सबको अपने से छोटा कर दिया. इससे कम से कम इतना  संदेह तो  हो ही गया कि वे पूरे देशभक्त तो नहीं हैं या फिर उनमे बुदधि  और विवेक की काफी कमी है . इससे ये भी सिद्ध होता है कि परदे का हीरो असल जिन्दगी में जीरो भी हो सकता है.

 एक बहुत सामान्य जानकारी का व्यक्ति भी बहुत आसानी से  समझ सकता है कि उनके बयान में कितना अहंकार है और शायद इसी अहंकार की वजह से पिछली बार  दर्शकों ने उनका मानमर्दन किया था. सोशल मीडिया पर उनकी बहुत भद्द  हुई थी. लोगों ने उनकी फिल्मों का बायकाट करना शुरू किया था और इसका बहुत नुकसान  उनको भुगतना पड़ा था. इसके लिए उन्होंने पूरी जनता से माफी भी मांगी थी लेकिन फिर भी अपनी आगामी फिल्म को ध्यान में रखते हुए नुकसान की भरपाई को पूरा करने के लिए जानबूझ कर सफाई दी. और तो और इंडिया टीवी के रजत शर्मा ने आज दिनांक १५ अप्रैल को शो टेलीकास्ट होने के एक दिन पहले ही इस प्रोग्राम के चुनिन्दा अंश  प्राइम टाइम के प्रोग्राम आज की बात जो मूलत: समाचारों का कार्यक्रम हैमें विस्तार से दिखाए. प्रोग्राम के शुरू के १० मिनट में सिर्फ शाहरुख़ खान की शहनाई बजाई गयी. कल १६ अप्रैल को शाहरुख़ की फिल्म रिलीज हो रही है और आज का ये प्रचार  सयोंग नहीं हो सकता. हालाकि शाहरुख़ खान विभिन्न चैनलों पर और विभिन्न कार्यक्रमों में अपनी फिल्म के प्रमोशन के सिलसिले में जाते रहे हैं.

ईश्वर ऐसे सभी लोगो को सद्बुद्धि दे जिससे वह सच्चे देशभक्त बनने का प्रयाश कर सकें.
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                              -शिव प्रकाश मिश्र

सोमवार, 22 फ़रवरी 2016

हिंदुस्तान जवानों के साथ ....? या राष्ट्र द्रोहियों के साथ ..?



आज जम्मू कश्मीर के एक आतंकवादी अभियान में सेना के 2 अधिकारियों सहित कुल 5 जवान शहीद हो गए. इसका कारण क्या है ? आतंकवाद के विरुद्ध बात नहीं हो रही है. बात चल रही है  तो जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय के उन  छात्रों की जिन्हीने  भारत की बर्बादी तक जंग लड़ने की बात कही थी ....और जम्मू कश्मीर की आजादी तक जंग की  बात की  थी . वे छात्र  अभी तक पकड़े नहीं जा सके हैं . कई राजनीतिक दलों के लोग उनका साथ दे रहे हैं . इन राष्ट्र विरोधी नारे लगाने वाले छात्रों के साथ खड़े हुए हैं. इनका मकसद क्या है ? इसका मतलब क्या है ? पहली बार  केंद्र में ऐसी सरकार है जो चाहे और जो भी न कर पा रही हो पर बहुसंख्यक वर्ग और देशभक्त लोगो में आशा का संचार कर रही है. जिससे पाकिस्तान समर्थक और देश के विरुद्ध काम करने कई गैर सरकारी संगठन सर्कार के विरुद्ध खड़े हो गए है. कभी अवार्ड वापसी, कभी असहिष्णुता, कभी FTII आन्दोलन, कभी IIT मद्रास, कभी हैदराबाद विश्वविद्यालय तो कभी JNU जैसी घटनाओं द्वारा न केवल सरकार  के लिए मुश्किलें खड़ी कर रहे हैं बल्कि ये देश का बेडा गर्क कर रहे हैं .

 क्या इसका मतलब सिर्फ और सिर्फ मोदी का विरोध करना और उनके विरुद्ध एक संयुक्त प्लेटफार्म खड़ा करना है ? ताकि आगे आने वाले चुनावों में  एक बेहतर विकल्प साबित कर सके और अल्पसंख्यकों के बोट  भी पा  सकें . कितनी दुर्भाग्यपूर्ण बात है कि  भारत जैसे देश में जहाँ  अभिव्यक्ति की इतनी अधिक आजादी है, वहां पर इसका कितना अधिक दुरूपयोग किया जा रहा है. क्या किसी अन्य देश में इस तरह की नारेबाजी की जा सकती है ? सरकार के इस निर्णय पर कि  केंद्रीय विश्वविद्यालयों के  कैंपस में राष्ट्रीय ध्वजा रोहण किया जाएगा, कई  राजनीतिक दलों के नेता इसके विरोध में आ गए हैं. उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय ध्वज फहराना इन विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता पर असर डालेगा. आज ज्यादा तर टी वी चैनलों पर आप  देख सकते हैं कि  एक अभियान चल रहा है और कई  चैनल्स इन राष्ट्र विरोधी तत्वो के साथ खड़े हैं .
  
JNU, जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय है  या जिन्ना विश्वविद्यालय ? पुलिस गेट पर खड़ी है और विश्वविद्यालय के कुलपति उसे अंदर आने की अनुमति नहीं दे रहे. वे  छात्र जिन्होंने भारत विरोधी नारे लगाए थे, वह कैंपस में घूम रहे हैं, सभाएं  कर रहे हैं और वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर डाल रहे हैं. वेवस पुलिस  छात्रों के  स्वयं ही सरेंडर करने का इंतजार कर रही है.  क्या ऐसे कुलपति को किसी विश्वविद्यालय के कुलपति बने रहने का अधिकार है ?  जादवपुर विश्वविद्यालय में एक कुलपति है, उन्होंने भी विश्वविद्यालय के अंतर्गत राष्ट्र विरोधी नारे लगाने, अफजल गुरु के समर्थन में नारे लगाने, याकूब मेमन की फांसी के विरोध में नारे लगाने वालों के खिलाफ कार्यवाही करने से इंकार कर दिया . उन्होंने कहा कि इस तरह की कोई शिकायत उनके संज्ञान में नहीं आई है, और जो हो गया सो हो गया आगे से कोशिश की जाएगी कि ऐसा न हो. ये क्या बात हुई ? यह कुलपति है या किसी विशेष मिशन के लिए रखे गए राजनीतिक दल के कार्यकर्ता . हिंदुस्तान की सबसे पुरानी पार्टी होने का दावा करने वाली पार्टी के सर्वे सर्वा इन छात्रों के समर्थन में है, और वह हर जगह बयान दे रहे हैं कि छात्रों का शोषण  किया जा रहा है. उन नेता को समझ नहीं है .... ये पूरा हिंदुस्तान समझता है. आज शहीद होने वाले सेना के जवानों के लिए कोई बात करने के लिए तैयार नहीं है लेकिन उन छात्रों के पक्ष में हवा बनायी जा रही है, जिन के खिलाफ सरकार ने मामले दर्ज किए हैं . उन वकीलों को जिन्होंने कन्हैया पर कोर्ट हमले का प्रयास किया था, ऐसे उदृत किया  जा रहा है जैसे इन वकीलों की हरकत देश द्रोहियों से  भी कहीं खराब  है. उनको भी देशद्रोही का दर्जा दिया जा रहा है और इसी ग्राउंड पर न्याय  पालिका की अवमानना को  बड़ी जोर शोर से उठाया जा रहा है. इन दोनों की तुलना की जा रही है कि मैं कौन ज्यादा देश्द्रोही  है .

संदेश साफ है जहां पर लोगों का नैतिक पतन इस हद तक हो  जाय कि वे अपने व्यक्तिगत या राजनैतिक स्वार्थ के लिए देश विरोधी गतिविधियों पर उतर आए और उन  के साथ खड़े हो जाएं हो देश द्रोही हो और देश के विरुद्ध युद्ध चला रहें है. ऐसे देश और ऐसे लोकतंत्र, का भगवान ही मालिक है .


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शिव प्रकाश मिश्र 
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बुधवार, 25 नवंबर 2015

आमिर भी दंगल में........... या दलदल में ........

एक सम्मान समारोह में आमिर खान ने कुछ ऐसा बयान दे दिया जिसे उनके प्रशंसक सकते में हैं.  कुछ प्रश्नों के जबाब में उन्होंने कहा कि  देश में डर और असुरक्षा का माहौल है और उनकी पत्नी ने  कुछ समय पहले उनसे हिंदुस्तान छोड़ने के लिए उनसे कहा था, क्यों कि वह अपने बच्चों के लिए बहुत चिंतित है. उन्होंने कहा कि पिछले  सात आठ महीने से ऐसा हुआ है, पता नहीं इसके पीछे कौन है ? स्वाभाविक है इस बयान से भूचाल आना ही था.


कुछ फिल्मो में बेहतरीन अदाकारी के कारण मैं आमिर खान का बहुत बड़ा फैन हूँ और देश के पर्यटन के ब्रांड एंबेसडर होने के कारण, जिसमे वह देश की इज्जत, मान- मर्यादा की बात करते हैं उनके प्रति  मेरा  सम्मान  और बढ़ गया था  लेकिन अनायास मुझे ऐसा क्यों लगने लगा  है कि मैं ठगा गया हूँ ? आमिर में जो मैंने देखा सुना वह सिर्फ ...... एक नाटक था और वे अच्छे कलाकार तो हैं लेकिन अच्छे इंसान नहीं. थ्री इडियट के, एक  इडियट वे नहीं, मैं हूँ और वे सारे लोग है जो उनके प्रसंशक हैं . अफ़सोस ... मैं उनकों क्या समझता था और वे क्या निकले. क्या एक कलाकार  जिसने तमाम ऐसे  किरदार निभाये हों  जिसमें जाति-पात धर्म  और संप्रदाय से  ऊपर उठकर काम करने की शिक्षा दी  हो, देश का  गौरव बढ़ाने की बात की हो और वह  लोकप्रियता के सर्वोच्च शिखर पर पहुंचने के बाद भी सिर्फ एक .... मुसलमान बन कर रह जाय, ....ये करोडों लोगो के दिल दुखाने की बात है. बड़े दिखने वाले लोग अंदर से कितने छोटे होतें हैं, इसका पता ऐसे वक्त में ही चलता है. पता नहीं उनकी बात में कितनी  सच्चाई है किन्तु  आमिर जैसा कोई व्यक्ति (या मुसलमान) जो इतना बड़ा व्यक्ति हो, पैसे वाला हो, इतना बड़ा स्टार हो, अगर वह अपने बच्चों के लिए चिंतित हैं, तो  स्वाभाविक कि आम  मुसलमान क्या सोचेगा ? और उसका क्या हाल होगा ? 

 आमिर खान ने अपने  इस बयान से देश का, समाज का और विशेष कर मुसलमानों का कितना अहित किया है, शायद इसका अंदाजा उन्हें नहीं है.  हर समाज में हर कौम में कुछ न कुछ तत्व मुख्यधारा से अलग होते हैं.  तमाम प्रयासों के वावजूद फैक्ट्री में भी तो कुछ डिफेक्टेड आइटम बन जाते हैं. हिन्दू समाज के ऐसे सिरफिरे लोगों की कुछ बातों को लेकर, जो बिलकुल भी नयी नहीं है हर शासनकाल में ऐसी बातें होती रहीं हैं, एक सुनियोजित अभियान चलाना, समझ से बाहर है.   हिन्दू समाज से ही नहीं किसी समाज से आदर्श की अपेक्षा करना बेमानी है. अगर आप राम जैसे भाई की कल्पना करते है, तो लक्ष्मण बनना सीखना होगा. आमिर का  बयान पूरे हिन्दू समाज के मुहँ पर एक तमाचा है.  इतने वर्षों तक मुझे कभी हिन्दू और मुसलमानों का अंतर समझ में नहीं आया आज उम्र के इस पड़ाव पर जैसे मुझे झकझोरा जा रहा कि मैं  हिन्दू हूँ ...मै  हिन्दू हूँ ....और मैं सोच रहा हूँ कि मैंने क्या गलती की ? हिंदुस्तान में मोदी सरकार बनने के बाद एक बड़ा वर्ग  जहां जोश और जश्न के मूड में था वही एक बड़ा वर्ग सदमे में था. इसमें ज्यादातर कांग्रेसी और बामपंथी विचारधारा से जुड़े ऐसे लोग भी थे, जिन्हें कालांतर में भारतीय जनता पार्टी और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के का डर दिखाकर उन के विरुद्ध खडा कर  दिया गया था. कई दशक बाद पूर्ण बहुमत की मोदी सरकार बहुतों के लिए अप्रत्याशित थी.. और बहुतों के लिए आज भी असहनीय है. मेरा और मेरे जैसे बहुत लोगों का मत बनता जा रहा है कि मोदी जरूर कुछ न कुछ अच्छा  कर रहे होंगे तभी तो उनका इतना विरोध किया जा रहा है यहाँ तक उनकी पार्टी के ही बहुत से लोग विरोध के स्वर दे रहें हैं. कई पार्टियों के लोग पाकिस्तान और आई एस आई से मोदी को  हटाने की गुहार लगा रहें हैं.  कई  संस्थान, राजनैतिक दल और देश  मिलकर ऐसी कूट रचनाएँ कर रहें हैं जिससे  सरकार को बदनाम किया जाय और ऐसा  करने में  वे चाहे अनचाहे हिन्दुस्तान को भी बदनाम कर रहे हैं ये उचित नहीं है.
आज जब तथा कथित बड़ी बड़ी हस्तियाँ देश को बदनाम करने की मुहिम में लग गयी हैं, हम सामान्य जनो को चाहिए कि वे देश हित में आगे आयें और ऐसे सुन्योजित अभियानों का पर्दाफास करे. जय हिन्द .                      ***********************************                                                          - शिव प्रकाश मिश्रा 

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गुरुवार, 22 अक्टूबर 2015

आप सभी को विजयादशमी की हार्दिक शुभकामनाये







माँ दुर्गा के मंत्र 


१.       नमो देव्यै महादेव्यै शिवायै  सततं  नमः .
      नमः प्रकृत्यै भद्रायै नियता: प्रणिता:स्मताम .. 

२.       या देवी सर्व भूतेषु लक्ष्मीरुपेण संस्थिता 
नमस्तस्यै नमस्तस्यै  नमो नमः ..

३.       या देवी सर्व भूतेषु बुद्धिरुपेण संस्थिता .
   नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

४.       या देवी  सर्व भूतेषु मातृरुपेण  संस्थिता
    नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः

५.       जयंती मंगला   काली भद्रकाली कपालिनी.
   दुर्गा क्षमा शिवा धात्री स्वाहा स्वधा नामेस्तु ते..

६.       देहि सौभाग्यमारोग्यम देहि में परम सुख़म .
    रुपम देहि जयं देहि यशो देहि द्विषो जहि ..

७.       सर्व   मंगलमंगल्ये शिवे सर्वार्थसाधिके .
      शरण्ये त्रयम्बके गौरी नारायणि नमोस्तु ते ..

८.       सर्व बाधा विनुर्मुक्तो धन धान्य सुतान्वित:
    मनुष्यों मत्प्रसादेन भविष्यति न संशय: ..

९.       शरणागत    दीनार्त   परित्राण परायणे .
  सर्वस्यर्तिहरे देवि नारायणि नमोस्तु ते ..

१०.    सर्वबाधाप्रश्मनं त्रिलोक्यस्याखिले श्वरि .
     एवमेव त्वया यर्मस्मद्वैरि  विनाशनम ..


*******शिव प्रकाश मिश्रा ***********

देश में वह शुरू हो गया, जो १५ वर्ष बाद होना था

भारत का राष्ट्रान्तरण: देश में वह शुरू हो गया, जो १५ वर्ष बाद होना था || विकसित भारत या विकसित इस्लामिक राष्ट्र? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ल...