शुक्रवार, 23 जुलाई 2021

दीन हीन और मुद्दा विहीन विपक्ष के पास पेगासस स्पाई वेयर

 पेगासस  स्पाई वेयर और विपक्ष का हंगामा  





दिनों दिन भारतीय राजनीति का  बदरंग चेहरा और  विकृत स्वरूप सामने आ रहा है. ज्यादातर राजनीतिक दलों को केवल अपनी चिंता सता रही है, शायद ही किसी को देश की चिंता हो अगर चिंता होती तो क्या देश के राजनीतिक दल जो संविधान  और  देश के प्रति निष्ठावान होने की  शपथ लेते हैं वह  अंतरराष्ट्रीय साजिश का एक हिस्सा बन जाते ?

 संसदीय हंगामा -



संसद के  मानसून अधिवेशन का पहला दिन ही जासूसी कांड के हंगामे की भेंट चढ़ गयाऔर  परंपरा के अनुरूप प्रधानमंत्री अपने नवनियुक्त मंत्रियों का परिचय भी सदन में  नहीं करा सके. हंगामें  का मुख्य कारण था  गार्जियन अखबार में एक  दिन पहले छपी रिपोर्ट जिसमें कहा गया था कि  इजरायली कंपनी एनएसओ के पेगासस सॉफ्टवेयर से भारत में कथित तौर पर 300 से ज्यादा हस्तियों के फोन हैक किए जाने  का संदेह है. वैसे भी सत्र  को हंगामा पूर्ण  करने के लिए विपक्षी राजनीतिक दलों ने पहले कहीं कमर कस ली थी. दावा किया जा रहा है कि जिन लोगों के फोन टैप किए गए उनमें कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद सिंह पटेल, पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर सहित कई पत्रकार भी शामिल हैं।

सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है और रिपोर्ट जारी होने की टाइमिंग को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। इस रिपोर्ट पर चर्चा की जाए अगर हम भारत के विपक्षी राज नेताओं के बयानों पर नजर डालें तो इस स्थिति स्पष्ट हो जाती है कि रिपोर्ट कहां से आई क्यों आए और इसका उद्देश्य क्या है?

 

राहुल गांधी की जासूसी की खबर से भड़की कांग्रेस ने  कहा- गृहमंत्री अमित शाह को तुरंत  बर्खास्त किया जाए. रणदीप सिंह सूरजेवाला ने कहा कि सरकार ने जासूसी करा कर देशद्रोह किया है. इजरायल के पेगासस सॉफ्टवेयर के जरिए जज, नेताओं आदि की जासूसी कराई जा रही है जो संविधान के मौलिक अधिकारों पर हमला है. इसके बाद तो जैसे विरोध की झड़ी लग गई बहती गंगा में  सपा, बसपा, शिवसेना, तृणमूल कांग्रेस और वामपंथी दल भी कूद पड़े.

इमरान भी हलकान -

कांग्रेश के  मोदी सरकार पर   आरोपों के   बाद पाकिस्तान के प्रधानमंत्री  इमरान खान भी उसमें शामिल हो गए और उन्होंने कहा उनका फोन भी भारत सरकार ने टेप  करवा कर जासूसी की है

 सरकार का पक्ष 

भारत सरकार ने कहा है कि सरकार पर कुछ लोगों की जासूसी का आरोप निराधार और सत्य  से परे है. बयान में कहा गया है कि इससे पहले भी इस तरह का दावा किया गया था, जिसमें वाट्सएप के ज़रिए पेगासस के इस्तेमाल की बात कही गई थी. वो रिपोर्ट भी तथ्यों पर आधारित नहीं थी और सभी पार्टियों ने दावों को खारिज किया था. वाट्सएप ने तो सुप्रीम कोर्ट में भी इन आरोपों से इनकार कर दिया था.

 

उस समय  आईटी मंत्री ने इस पर विस्तार से संसद में बयां दिया था कि अनधिकृत तरीके से सरकारी एजेंसी द्वारा किसी तरह की कोई टैपिंग नहीं की गई है. इंटरसेप्शन के लिए सरकारी एजेंसी प्रोटोकॉल के तहत ही काम करती है. टैपिंग का काम किसी बड़ी वजह और राष्ट्रीय सुरक्षा के मद्देनज़र ही किया जाता है. ये खबर भारतीय लोकतंत्र और इसके संस्थानों को बदनाम करने के अनुमानों और अतिश्योक्ति पर आधारित है. सरकार ने अपने जवाब में साफ़ किया है कि छापी गयी रिपोर्ट बोगस है और पूर्वाग्रह से ग्रसित है.

 

क्या है छुपा अजेंडा ? 

यह बात बताना भी  सामयिक  होगा कि मोदी सरकार के दूसरे कार्यकाल में  विपक्ष  बहुत हताश है  और खास तौर से कांग्रेसी  बिल्कुल दीन हीन मुद्रा में आ गई है.  मोदी सरकार ने देश के लिए कुछ बहुत अच्छे कार्य किए हैं लेकिन ऐसा भी नहीं है कि पूरा देश बहुत गदगद  है लेकिन भारत  में  मीडिया  गैर सरकारी संगठन  नौकरशाह  और बुद्धिजीवियों का एक ऐसा बड़ा  वर्ग जो में सरकार के पैसे से  ऐशो  आराम की जिंदगी जीता था, अब उसका जीना हराम हो गया है . इसलिए  स्वाभाविक है कि   इन सरकारजीवियों और परजीवियों  के साथ साथ कांग्रेस  और अन्य  विपक्षी दलकिसी भी तरह मोदी सरकार को घेरने, बदनाम करने और पदच्युत करने के लिए कुछ भी करने को तैयार है.  ऐसी कई रिपोर्ट सामने आई है जिनसे पता चलता  है कि एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय साजिश मोदी सरकार के विरुद्ध  रची गई है  जिसका  उद्देश्य मोदी सरकार को जितना जल्दी संभव हो चलता करना है.  ऐसी ही एक साजिश के तहत अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को चलता किया गया था और उसके बाद जो भी आंदोलन अमेरिका में दिखाई पड़ रहे थे  वह  स्वत:  शांत हो गए.  ऐसी भी  सूचना है कि इस अंतरराष्ट्रीय साजिश में चीन एक बड़े  खिलाड़ी  के रूप में शामिल है  और पाकिस्तान उसके इशारे पर  उल जलूल  हरकतें कर रहा है . वामपंथी और  इस्लामिक गठजोड़ किसी भी कीमत पर  मोदी को हटाने के लिए पूरी तरह कमर कस चुका है.   इस पूरी मुहिम में कुछ बड़े मीडिया हाउस जुड़े हुए हैं.  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर वाशिंगटन पोस्ट, गार्जियन, न्यूयोर्क टाइम्स  और राष्ट्रीय स्तर पर  भी कई मीडिया हाउस जुड़े हुए हैं.  यह पूरा गठजोड़  इस तरह से काम करता है कि किसी भी मुद्दे  के आधार पर पूरे देश में वातावरण तैयार किया जाता है और उसके लिए ट्विटर, फेसबुक  और  व्हाट्सएप  सहित सोशल मीडिया का भरपूर इस्तेमाल किया जाता है. 

हाल ही में घटित कुछ घटनाएं जिसमें अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मीडिया सोशल मीडिया,  वामपंथ और इस्लामिक गठजोड़ तथा  राजनीतिक  दल  शामिल हैं. 

  • संशोधित नागरिकता कानून के मुद्दे पर देशव्यापी प्रदर्शन और शाहीन बाग शो को संपूर्ण विपक्ष द्वारा  समर्थन देना

  • ट्रंप की भारत यात्रा के दौरान दिल्ली को दंगों से  दहलाना और  सभी विपक्षी दलों द्वारा दंगों के लिए मोदी सरकार को घेरना 

  • कृषि कानूनों के विरुद्ध  किसान आंदोलन  और सभी विपक्षी दलों द्वारा  समर्थन

  •  इन दोनों ही आंदोलनों के पीछे टूल किट का प्रयोग 

  • सेंट्रल विस्ता प्रोजेक्ट का अंतराष्ट्रीय स्तर  विरोध - वाशिंगटन पोस्ट और गार्जियन में भ्रामक लेख  

  • कोरोना  महामारी के  दौरान  कांग्रेस, आप सहित ज्यादातर विपक्षी दलों द्वारा  बेहद निम्न स्तर  की राजनीति

  •  कोरोना  वैक्सीन पर  नकारात्मकता फैलाकर लोगों को  वैक्सीन  लेने से रोकना  

  • वैक्सीन की कमी पर  केंद्र  सरकार को घेरना

  • ऑक्सीजन तथा स्वास्थ्य संसाधनों की कृत्रिम कमी  पैदा कर या  दिखाकर लोगों की जान माल से खिलवाड़ की कीमत पर मोदी सरकार को बदनाम करने का प्रबंध करना 

  • भारत के श्मशान घाट और गंगा में बहती हुई लाशों  के फोटो अंतरराष्ट्रीय मीडिया में प्रचारित और प्रसारित करना,  बहुत से पुरानी फोटो इस्तेमाल करके सनसनी पैदा करना  

अंतरराष्ट्रीय मीडिया की भूमिका - 

अगर इन सब को ध्यान से देखा जाए तो यह कहीं न कहीं एक टूल किट से अंतरराष्ट्रीय मीडिया वामपंथ इस्लामिक गठजोड़ और भारत के विपक्षी राजनीतिक दलों को आपस में जोड़ता दिखाई पड़ेगा. इस अंतरराष्ट्रीय साजिश में वाशिंगटन पोस्ट, गार्जियन और   न्यूयॉर्क   टाइम्स ने  मीडिया पार्टनर की भूमिका अदा की और कभी-कभी तो चीन के ग्लोबल टाइम्स और इन सभी  अखबारों की  एक ही लाइन होती है. 

 गार्जियन  ने अपने अखबार की हेडलाइंस में राहुल गांधी को मोदी का मुख्य प्रतिद्वंदी बताया है और पहले पन्ने पर राहुल की मोदी के साथ तस्वीर है.   गार्जियन के  एक अंक में राहुल की मुख्य तस्वीर  है और मोदी को उनके पीछे खड़ा  दिखाया गया है.  वहीं दूसरे अंक में  राहुल की तस्वीरों के कोलार्ज   प्रकाशित किए गए हैं और हेडिंग  में लिखा है “भारत में स्पाइवेयर के खुलासे पर विपक्ष ने मोदी पर लगाया देशद्रोह का आरोप”




वाशिंगटन पोस्ट ने अपने 19 जुलाई के अंक में लिखा कि  पेगासस स्पाइवेयर आतंकवाद से लड़ने के लिए सरकारों को बेचा जाता है लेकिन  भारत में इसका इस्तेमाल पत्रकारों और अन्य लोगों को हैक करने के लिए किया  गया है .  इसके मुख्य पृष्ठ पर राहुल और प्रियंका  का रोड शो करते हुए चुनाव की  भीड़ की फोटो दिखाई गई है जिसमें उनकी लोकप्रियता को रेखांकित करने की कोशिश की गई है.  



द वायर’ अपनी हेडलाइंस में  लिखता  है, “लीक डेटा बताता है कि एल्गार परिषद मामले में हद से ज्यादा निगरानी की गई है।” द वायर के अन्य शीर्षक में कहा गया है, “जासूसी वाली सूची में 40 भारतीय पत्रकार हैं, फोरेंसिक जाँच से पेगासस स्पाइवेयर की उपस्थिति की पुष्टि  हुई ।”

 सनसनी फ़ैलाने के लिए रिपोर्ट्स को तोड़मरोड़ के प्रस्तुत किया गया है.  

किसने तैयार की रिपोर्ट ? 

फ्रांस की संस्था फोरबिडेन स्टोरीज ( Forbidden Stories) और एमनेस्टी इंटरनेशनल (Amnesty international) ने मिलकर खुलासा किया है कि इजरायली कंपनी एन एस ओ (NSO) के स्पाइवेयर पेगासस के जरिए दुनिया भर की सरकारें पत्रकारों, कानूनविदों, नेताओं और यहां तक कि नेताओं के रिश्तेदारों की जासूसी करा रही हैं. इस जांच को पेगासस प्रोजेक्ट  का नाम दिया गया है. इस तथाकथित प्रोजेक्ट की जो पहली रिपोर्ट है उसमें यह दावा किया  गया है  कि निगरानी वाली लिस्ट में  विश्व के 50 हजार लोगों के नाम हैं.  पहली लिस्ट  में  40 भारतीय नाम हैं. इस रिपोर्ट की सत्यता  हमेशा संदिग्ध रहेगी  क्योंकि  एक तो इस प्रोजेक्ट के पीछे काम करने वाले लोगों की सत्यनिष्ठा ही संदिग्ध है  और दूसरा  कारण यह है  कि इस तरह के स्पाइवेयर  के डाटा बेस में  जितने  भी नंबर पाए जा सकते हैं, जरूरी नहीं कि उनकी जासूसी की गयी  हो.  बहुत संभव है कि इनमें से अधिकांश नंबर उन फोन  के कांटेक्ट लिस्ट में होंगे   जिन की निगरानी  या जासूसी  की गई  होगी . इसलिए इस रिपोर्ट को जितना सनसनीखेज बनाकर बताया जा रहा है उतनी गंभीरता  नहीं हो सकती है. 

 

इस रिपोर्ट में कितनी सच्चाई है यह अलग विषय है  लेकिन    विदेशी मीडिया में बनी इन हेडलाइंस  से आसानी से समझा जा सकता है कि  यह मीडिया  भारत  में   किस राजनैतिक दल के लिए काम कर रही  हैं.

अब समझने की कोशिश करते हैं कि पेगासस का ये स्पाइवेयर सॉफ्टवेयर कैसे काम करता है  और  इससे क्या निजता भंग हो सकती है ?

 क्या है  पेगासस सॉफ्टवेर ? 

इजरायल की कंपनी एनएसओ साइबर सुरक्षा के क्षेत्र में काम करती है। दुनिया में बढ़ते अपराध और आतंकवाद को देखते हुए कंपनी ने इस तरह का सॉफ्टवेयर बनाने पर विचार किया जो अपराधियों को पकड़ने में खुफिया एवं सुरक्षा एजेंसियों की मदद करे। इसे ध्यान में रखते हुए कंपनी ने पेगासस सॉफ्टवेयर तैयार किया। कंपनी अपना यह अप्लिकेशन केवल  सरकारों को बेचती है। किसी निजी व्यक्ति के हाथ में यह सॉफ्टवेयर नहीं आता। कंपनी अपने इस सॉफ्टवेयर के लाइसेंस के लिए काफी  पैसे लेती है। 

यह साफ्टवेयर  भारत में पहली बार 2019 में उस समय चर्चा में आया था जब कई मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के वाट्सएप से डाटा चोरी होने की रिपोर्ट सामने आई थी। उस समय सरकार और स्वयं विपक्षी दलों तथा व्हाट्सएप में इसे गलत बताया था और व्हाट्सएप में तो इस आशय का एक हलफनामा भी सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल किया था.  यह मामला उसी समय खत्म हो गया था.

पहली बार 2016 में संयुक्त अरब अमीरात के मानवाधिकार कार्यकर्ता पर इस्तेमाल के बाद यह सामने आया था। इसने आइफोन की सुरक्षा को भी तोड़ दिया था। बाद में आइफोन इससे निपटने के लिए अपडेट लाया था। 2017 में सामने आया था  कि यह साफ्टवेयर एंड्रायड की सुरक्षा को भी भेद सकता है। यह इकलौता साफ्टवेयर कई जासूसों को मात देने में सक्षम है। इसे इस तरह से डिजाइन किया गया है कि सामने वाले को अपने फोन में इसके होने की भनक भी नहीं लगती।

 इस तरह कार्य करता है स्पाइवेयर 

  • मोबाइल में एक बग के रूप में खुद को इंस्टाल कर लेता है

  • यह मोबाइल की काल और हिस्ट्री को भी डिलीट कर सकता है

  • डाटा चोरी की खबर ना लगे इसके लिए सभी साक्ष्य मिटा देता है

  • केवल वाईफाई पर ही काम करता है, जिससे किसी को पता न लग सके

  • वायस काल और वाट्सएप के जरिये भी मोबाइल पर इंस्टाल हो सकता है

  • एक बार इंस्टाल होने पर मोबाइल पर मौजूद सभी डाटा एक्सेस कर सकता है

इन जानकारियों को  देख सकता है 

  • मैसेज और मेल पढ़ सकता है

  • फोन काल को सुन सकता है

  • कांटेक्ट की जानकारी ले सकता है

  • मोबाइल से स्क्रीनशाट ले सकता है

  • मोबाइल के कैमरा और माइक का इस्तेमाल कर सकता है

  • यूजर के फोन की रियल टाइम लोकेशन का पता लगा सकता है.

ज्यादातर सॉफ्टवेयर  इन जानकारियों को प्राप्त करने की क्षमता रखते हैं . जब भी कभी आप कोई सॉफ्टवेयर डाउनलोड करके इंस्टॉल करते हैं तो वह आपसे इन सूचनाओं को प्राप्त करने की अनुमति मांगता है और आप जल्दबाजी में   अनुमति देते जाते हैं और इस तरह से कई एप्प आपकी यह सभी जानकारी समेट लेते हैं और इसी कारण भारत सरकार ने कई चीनी एप्लीकेशंस को  प्रतिबंधित कर दिया था.   

भारत में   ही नहीं विश्व में ज्यादातर लोग मुफ्त  मिलने वाली चीजों के प्रति बेहद लालची होते हैं, मुफ्त का खाना हो,  शराब हो या सॉफ्टवेयर,   मुफ्त चीजों का मजा ही कुछ और होता है.   ऐसे में  लोग मुफ्त के सॉफ्टवेयर भी धड़ल्ले से डाउनलोड कर इस्तेमाल करते हैं  और तब आप की जानकारी अपने आप इन एप्लीकेशन के पास  जा सकती  है. आपकी इस तरह की जानकारी तो गूगल के पास भी है. 

लेकिन पेगासस खतरनाक इसलिए है   कि यह किसी भी स्मार्टफोन में मिस्ड कॉल या फोन कॉल  के माध्यम से बिना अनुमति के इंस्टॉल हो सकता है और यह सामान्यतः यूजर देख भी नहीं सकता है. 


लेकिन सबसे बड़ी बात यह है  कि ये  स्पाई वेयर केवल स्मार्टफोन में ही  काम कर सकता है बेसिक फोन में नहीं इसलिए आज भी बेसिक फोन   जिन्हें  केवल बात करने और मैसेज प्राप्त करने के लिए इस्तेमाल किया जाता है ज्यादा सुरक्षित होते हैं. 


किससे साझा की गयी ये रिपोर्ट ?

पेरिस स्थित गैर-लाभकारी  संगठन  'फॉरबिडन स्टोरीज एवं मानवाधिकार समूह 'एमनेस्टी इंटरनेशनल द्वारा लीक हुए आंकड़ों के आधार पर बनाई गई  है जिसे 16 समाचार संगठनों के साथ साझा की गई  है .रिपोर्ट में कहा गया है  कि इजराइल स्थित कंपनी 'एनएसओ ग्रुप के सैन्य दर्जे के  स्पाइवेयर  का इस्तेमाल पत्रकारों, मानवाधिकार कार्यकर्ताओं और राजनीतिक असंतुष्टों की जासूसी करने के लिए किया जा रहा है। 

वैश्विक मीडिया संघ के सदस्य 'द वाशिंगटन पोस्ट के अनुसार, जिन लोगों को संभावित निगरानी के लिए चुना गया, उनमें पत्रकार, नेता एवं सरकारी अधिकारी, व्यावसायिक अधिकारी,  मानवाधिकार कार्यकर्ता और कई राष्ट्राध्यक्ष शामिल हैं। ये पत्रकार  मुख्यतया   'द एसोसिएटेड प्रेस (एपी), 'रॉयटर, 'सीएनएन, 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल, 'ले मोंदे और 'द फाइनेंशियल टाइम्स से  हैं।

 एनएसओ ग्रुप के स्पाइवेयर को मुख्य रूप से पश्चिम एशिया और मैक्सिको में निगरानी के लिए इस्तेमाल किए जाने के आरोप हैं। सऊदी अरब को एनएसओ के ग्राहकों में से एक बताया जाता है। इसके अलावा सूची में फ्रांस, हंगरी, भारत, अजरबैजान, कजाकिस्तान और पाकिस्तान सहित कई देशों के फोन हैं। इस सूची में मैक्सिको के सर्वाधिक फोन नंबर हैं। इसमें मैक्सिको के 15,000 नंबर हैं।

भारत में तथाकथित जासूसी  से प्रभावित लोग 

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी, भाजपा के मंत्रियों अश्विनी वैष्णव और प्रह्लाद सिंह पटेल, पूर्व निर्वाचन आयुक्त अशोक लवासा और चुनाव रणनीतिकार प्रशांत किशोर उन लोगों में शामिल हैं, जिनके फोन नंबरों को इजराइली स्पाइवेयर के जरिए हैकिंग के लिए सूचीबद्ध किया गया था। 

 पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के भतीजे तथा तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद अभिषेक बनर्जी और भारत के पूर्व प्रधान न्यायाधीश रंजन गोगोई पर अप्रैल 2019 में यौन उत्पीड़न का आरोप लगाने वाली उच्चतम न्यायालय की कर्मचारी और उसके रिश्तेदारों से जुड़े 11 फोन नंबर हैकरों के निशाने पर थे। 

रिपोर्ट के अनुसार सूची में राजस्थान की मुख्यमंत्री रहते वसुंधरा राजे सिंधिया के निजी सचिव और संजय काचरू का नाम शामिल था, जो 2014 से 2019 के दौरान केन्द्रीय मंत्री के रूप में स्मृति ईरानी के पहले कार्यकाल के दौरान उनके विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) थे। इस सूची में भारतीय जनता पार्टी से जुड़े अन्य जूनियर नेताओं और विश्व हिंदू परिषद के नेता प्रवीण तोगड़िया का फोन नंबर भी शामिल था। 

‘द गार्डियन’ की ओर 18 जुलाई  2021  की  रात जारी इस बहुस्तरीय जांच की पहली किस्त में दावा किया गया है कि 40 भारतीय पत्रकारों सहित दुनियाभर के 180 संवाददाताओं के फोन हैक किए गए। इनमें ‘हिन्दुस्तान टाइम्स’ और ‘मिंट’ के तीन पत्रकारों के अलावा ‘फाइनैंशियल टाइम्स’ की संपादक रौला खलाफ तथा इंडिया टुडे, नेटवर्क-18, द हिंदू, द इंडियन एक्सप्रेस, द वॉल स्ट्रीट जर्नल, सीएनएन, द न्यूयॉर्क टाइम्स व ले मॉन्टे के वरिष्ठ संवाददाताओं के फोन शामिल हैं। जांच में दिल्ली यूनिवर्सिटी के एक पूर्व प्रोफेसर और जून 2018 से अक्तूबर 2020 के बीच एल्गार परिषद मामले में गिरफ्तार आठ कार्यकर्ताओं के फोन हैक किए जाने का भी दावा किया गया है।


केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा, ''इस तथाकथित रिपोर्ट के लीक होने का समय और फिर संसद में ये व्यवधान, इसे जोड़कर देखने की आवश्यक्ता है। यह एक विघटनकारी वैश्विक संगठन हैं जो भारत की प्रगति को पसंद नहीं करता है। ये अवरोधक भारत में राजनीतिक खिलाड़ी हैं जो नहीं चाहते कि भारत प्रगति करे। भारत के लोग इस घटना और संबंध को समझने में बहुत परिपक्व हैं।' 


इसराइली कंपनी एनएसओ का स्पष्टीकरण 

इजरायली कंपनी एनएसओ ने जांच रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए कहा कि एमनेस्टी इंटरनेशनल और फॉरबिडेन स्टोरीज का डाटा गुमराह  करने वाला  है। यह डाटा उन नंबरों का नहीं हो सकता है, जिनकी सरकारों ने निगरानी की है। इसके अलावा ये लोग एनएसओ के  ग्राहकों की खुफिया निगरानी की गतिविधियों से वाकिफ नहीं है।

 कंपनी ने  इस बात का बिल्कुल भी खुलासा नहीं किया  कि उनका यह सॉफ्टवेयर कैसे काम करता है?  और यह बहुत स्वाभाविक भी है क्योंकि कई बार वैश्विक संगठन  झूठ  रिपोर्ट बना कर न केवल इस तरह के महत्वपूर्ण सॉफ्टवेयर  या वैज्ञानिक कार्य की टोह लेने की कोशिश करते हैं,  बल्कि उस कंपनी को ब्लैकमेल कर पैसा एंठने  का काम भी करते हैं.   

इसमें कोई कोइ दो राय नहीं हो सकती कि इजराइल  साइबर सुरक्षा के सॉफ्टवेयर के मामले में विश्व में अग्रणी है  और  इस क्रम में पेगासस  स्पाइवेयर  काफी अच्छा सॉफ्टवेयर है जिसे  जासूसी के क्षेत्र में अचूक माना जाता है। तकनीक जानकारों का दावा है कि इससे व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे एप भी सुरक्षित नहीं,  कि यह फोन में मौजूद एंड टू एंड एंक्रिप्टेड चैट को भी पढ़ सकता है। लेकिन इसकी पुष्टि अभी तक नहीं हो सकी है. 

इस तरह की मीडिया रिपोर्ट ने इस सॉफ्टवेयर को विश्व में  सर्वश्रेष्ठ स्पाइवेयर के तौर पर प्रतिष्ठित कर दिया है और मुद्दा विहीन भारतीय विपक्ष को एक मुद्दा दे दिया है. 

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  • शिव मिश्रा 

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शुक्रवार, 16 जुलाई 2021

पश्चिम बंगाल की हिंसा पर एनएचआरसी की रिपोर्ट. अब करेगी केंद्र सरकार ?

 कोलकाता उच्च न्यायालय के निर्देश पर गठित राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की 7 सदस्य टीम ने पश्चिम बंगाल का दौरा किया. दुर्भाग्य से यह टीम, जो हिंसा की जांच करने गई थी, स्वयं हिंसा का शिकार हो गई और जादवपुर में उसके ऊपर हमला किया गया. इनको वापस आना पड़ा और इसके बाद केंद्रीय सुरक्षा बलों के साये में इस टीम ने अपना कार्य प्रारंभ किया. टीम ने 20 दिनों में 311 से अधिक जगहों पर दौरा किया और 50 पेज की अपनी एक रिपोर्ट कोलकाता उच्च न्यायालय को सौंप दी है .




रिपोर्ट के अंश के समाचार पत्रों में प्रकाशित होने के तुरंत बाद ममता बनर्जी ने केंद्र सरकार पर जबरदस्त प्रहार किया और उसे रिपोर्ट लीक होने का जिम्मेदार ठहराया. लेकिन टीम के अध्यक्ष ने बताया कि उन्होंने रिपोर्ट की एक कॉपी राज्य सरकार को भी भेजी थी इसलिए राज्य सरकार का यह कहना उचित नहीं है कि रिपोर्ट टीम ने लीक की है.

50 पन्ने की अपनी रिपोर्ट में टीम ने जिन बड़े अपराधी तत्वों के नाम अपनी रिपोर्ट में लिखे हैं वे ज्यादातर तृणमूल कांग्रेस के बड़े नेता या कार्यकर्ता है.

रिपोर्ट से पता चलता है कि पुलिस ने ज्यादातर मामलों में रिपोर्ट भी दर्ज नहीं की लेकिन जो भी रिपोर्ट दर्ज की गई है उनमें 9300 व्यक्तियों को नामजद किया गया है किंतु पुलिस ने अब तक केवल 1300 लोगों को गिरफ्तार किया है और उनमें से भी 1086 लोगों को थाने से ही जमानत दे दी गई.

रिपोर्ट में लिखा है हिंसा के सभी मामले सत्ताधारी दल ने अपने विरोधियों को सबक सिखाने के लिए जानबूझकर किए.

टीम ने सख्त टिप्पणी करते हुए लिखा है कि पश्चिम बंगाल में कानून का शासन नहीं है बल्कि शासक का शासन है यानी ममता बनर्जी और उनकी तृणमूल कांग्रेस की व्यक्तिगत राज शाही है.

पश्चिम बंगाल में अगर तुरंत हत्याये नहीं रोकी गई तो गणतंत्र की हत्या हो जाएगी

अपनी रिपोर्ट में टीम ने प्रमुख संस्तुति की है कि -

  • जिन गांव में हिंसा के 5 से अधिक मामले आए हैं वहां लोगों में विश्वास बनाए रखने के लिए और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय सुरक्षा बल तैनात किए जाएं.

  • हत्या बलात्कार आगजनी लूटपाट के सभी मामले केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दे जाएं क्योंकि राज्य पुलिस पर लोगों का भरोसा बिल्कुल भी नहीं बचा है

  • तभी मुकदमों की ट्राई राज्य के बाहर किये जाए जिसके लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट का गठन किया जाए ताकि लोगों को त्वरित निर्णय दिए जा सकें और उन्हें पुनर्वास रोजगार तथा आर्थिक सहायता शीघ्रता से उपलब्ध कराई जा सके

  • सर्वोच्च न्यायालय की देखरेख में एसआईटी गठित की जाए जिसमें वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी नियुक्त किए जाएं जो राज्य सरकार के अधिकारियों के दबाव में ना आए.

केंद्र सरकार पश्चिम बंगाल के चुनाव परिणाम आने के बाद से ही बहुत ही रक्षात्मक मुद्रा में है जिससे न केवल भाजपा के कार्यकर्ताओं का बल्कि सामान्य जनमानस का मनोबल भी गिर रहा है. कितने ही ऐसे लोग जिन्होंने तृणमूल कांग्रेस छोड़कर भाजपा ज्वाइन की थी अब सट्टा और आतंक के दबाव में अपना मुंडन करवा कर, दुख प्रकट करके, क्षमा मांग कर वापस तृणमूल कांग्रेस में आ रहे हैं.

सभी बुद्धिजीवियों में यह धारणा थी कि शायद भाजपा यह चाहती है कि उस पर धारा 356 के दुरुपयोग का आरोप ना लगे इसलिए बहुत मजबूत केस पश्चिम बंगाल सरकार के विरुद्ध बना रही है . यह कहते-कहते भी कई महीने बीत गए हैं इस बीच केंद्र सरकार ने अधिकारियों के स्थानांतरण सहित मुख्य सचिव को कारण बताओ नोटिस देकर यह संकेत दिया था कि शायद कोई सख्त कार्यवाही की जाएगी जो पुलिस और नौकरशाहों के लिए भी उदाहरण बन सकेगी. पर अभी तक कुछ नहीं हुआ.

पश्चिम बंगाल की हिंसा को लेकर सर्वोच्च न्यायालय भी उदासीन रहा लेकिन अब जो भी कोलकाता उच्च न्यायालय ने बहुत गंभीर टिप्पणियां की हैं सर्वोच्च न्यायालय ने भी पश्चिम बंगाल की सरकार की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं और अब आखिर में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की रिपोर्ट में ममता की निर्ममता को पूरी तरह से उजागर कर दिया है, अब केंद्र सरकार सरकार किस चीज का इंतजार कर रही है ? अब इससे उपयुक्त मौका नहीं आएगा.

लोग भले ही कांग्रेस सरकार पर आरोप लगाते रहे हो कि उन्होंने धारा 356 का भयंकर दुरुपयोग किया लेकिन क्या करें भाजपा को जो धारा 356 का सदुपयोग भी नहीं कर पा रही है जबकि यह लोगों की जानमाल की रक्षा के लिए अत्यंत आवश्यक है और यह पहली बार है जब लगभग समूचा देश पश्चिम बंगाल में राष्ट्रपति शासन की मांग कर रहा है. अब तो केंद्र सरकार के लिए यही कहा जा सकता है कि

“मत चूको चौहान”

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- शिव मिश्रा

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मंगलवार, 13 जुलाई 2021

उत्तर प्रदेश का प्रस्तावित जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण और कल्याण) विधेयक, 2021- लक्ष्य से भटकता कानून

 


उत्तर प्रदेश का प्रस्तावित जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण और कल्याण) विधेयक, 2021- लक्ष्य से भटकता कानून

 


क्या प्रस्तावित जनसंख्या विधेयक अपना लक्ष्य प्राप्त का सकेगा ?


भारत में जनसंख्या विस्फोट को देखते हुए एक अत्यंत प्रभावी जनसंख्या नियंत्रण कानून की आवश्यकता है  जिससे  आर्थिक विकास की गति तेज हो सके और लोगों के जीवन स्तर में अपेक्षित सुधार लाया जा सके. अभी स्थिति यह है  कि देश में जितने संसाधन  उत्पन्न किए जाते हैं,  वह बढ़ती जनसंख्या के कारण पर्याप्त नहीं हो पाते हैं और इस कारण देश में अपेक्षित विकास  नहीं हो पा रहा है. 


जनसंख्या वृद्धि  कुपोषण से लेकर शिक्षा और रोजगार सभी को प्रभावित कर रही है. इसलिए उत्तर प्रदेश  जैसे  बड़े राज्य के लिए जिसकी जनसंख्या  विश्व के 4 देशों चीन, भारत अमेरिका और इंडोनेशिया को छोड़कर सभी देशों से ज्यादा है,  जनसंख्या नियंत्रण  कानून की अत्यंत आवश्यकता है, इसमें कोई संदेह नहीं  बल्कि इसे बहुत पहले प्रदेश में लागू किया जाना चाहिए था. 


भारत में जनसंख्या की समस्या : 


जनसंख्या नियंत्रण की नीति बनाते समय देश के समक्ष जनसंख्या चुनौती को भी ध्यान में रखना अनिवार्य है जिससे नियंत्रण, स्थिरीकरण  के साथ  साथ विभिन्न धार्मिक समुदायों के बीच संतुलन  भी बना रहे. 


यह कोई  छिपी  बात नहीं की आजादी के बाद से हिंदुओं की तुलना में मुस्लिमों की जनसंख्या में बहुत तीव्र गति से  वृद्धि  हो रही है. इसका सबसे बड़ा कारण  है कि इस समुदाय द्वारा   धार्मिक आधार पर परिवार नियोजन  न अपनाया जाना,  यद्यपि पढ़े-लिखे मुस्लिम परिवारों में  काफी हद तक  परिवार नियोजित किए जा रहे हैं. 


मुस्लिम जनसंख्या  की तेजी से वृद्धि  होना केवल भारत की नहीं बल्कि विश्व के अनेक देशों की समस्या है. कई देश ऐसे हैं जहां जनसांख्यिकी इस तरह से बदल गई  है, जहां पहले तरह तरह की समस्याएं उत्पन्न हुई  और फिर वहां के मूल निवासियों का जीना दूभर हो गया.  इसके बाद  कई देश इस्लामिक देश बन गए.  दूसरे  मत के लोगों का या तो  धर्मांतरण हो गया या पलायन हो गया.  इस सब के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक सुनियोजित साजिश काम करती रहती है जिसके लिए कई मुस्लिम देश धन उपलब्ध कराते हैं. 


भारत में भी इस तरह की समस्या आजादी के बाद से ही देखी जा रही है कम से कम आठ ऐसे राज्य हैं जहां  हिंदू अल्पसंख्यक हो गए हैं  और ऐसे राज्यों में अलगाववाद  एक नासूर  बन गया है .  जम्मू कश्मीर इसका एक  ज्वलंत उदाहरण है,  जहां से कश्मीरी पंडितों  का नरसंहार किया गया और उन्हें घाटी छोड़ने के लिए मजबूर कर दिया गया. अपने ही देश में यह कश्मीरी पंडित दशकों से शरणार्थी जीवन व्यतीत कर रहे हैं. 


पश्चिम बंगाल में बांग्लादेश से  लगे सीमावर्ती जिलों में  जनसंख्या घनत्व तेजी से बदल गया है और कई जगह मुस्लिम जनसंख्या का प्रतिशत 90% तक पहुंच गया है. पिछले चुनाव में  पूरे देश ने देखा कि तुष्टिकरण की  छत्रछाया में  पूरे पश्चिम बंगाल में हिंसा का भयंकर तांडव हुआ.  हत्या, लूटपाट और बलात्कार की इतनी घटनाएं हुई कि लोगों को बरबस देश के विभाजन के समय हुई  घटनाओं की यादें ताजा हो गई.  पश्चिम बंगाल के लाखों लोगों ने  जान बचाने के लिए अन्य राज्यों में शरण ली.  अगर दूसरी राज्यों में  भागने का अवसर  उपलब्ध नहीं होता तो इन हिंदू शरणार्थियों के पास मरने या  धर्म बदलने के अलावा  कोई दूसरा विकल्प नहीं होता. 


  भारत में इस समय मुस्लिम आबादी बढ़ाने के  लिए एक साथ कई मोर्चों पर काम किया जा रहा है और इसमें घरेलू और अंतरराष्ट्रीय दोनों शक्तियां  काम कर रही हैं और उन्होंने पूरे भारत में   अपना जाल बिछा रखा है.  इनमें धर्मांतरण,  लव जिहाद, अवैध  घुसपैठ करा कर  बांग्लादेशियों  और  रोहिंग्याओं  को पूरे भारतवर्ष में योजनाबद्ध तरीके से बसाना,  रणनीतिक स्थानों से हिंदू समुदाय  का पलायन करवाना और  परिवार नियोजन न अपना कर  ज्यादा से ज्यादा जनसंख्या बढ़ाना  शामिल है.   

 


उक्त  परिपेक्ष में  अगर हम उत्तर प्रदेश के प्रस्तावित जनसंख्या (नियंत्रण, स्थिरीकरण और कल्याण) विधेयक, 2021का विश्लेषण करें तो उसमें कुछ गंभीर खामियां नजर आती  हैं. 


क्या है प्रस्तावित कानून ? 


उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारियों के लिए प्रोत्साहन

उत्तर प्रदेश सरकार के कर्मचारी जो स्वैच्छिक रूप से परिवार नियोजन का पालन  करने के लिए नसबंदी कराएंगे उनके लिए निम्न प्रोत्साहन  की व्यवस्था है 

  •  2 अतिरिक्त वेतन वृद्धि 

  • भूखंड या मकान खरीदने हेतु अनुदान 

  • मकान खरीदने के लिए बहुत  कम ब्याज दर पर  पर सॉफ्ट लोन

  • पानी, बिजली, गृह कर और जलकर में रियायत

  • एक  साल का  पूर्ण  वेतन पर मातृत्व या  पितृत्व  अवकाश

  • नियोक्ता द्वारा एनपीएस में 3% ज्यादा अंशदान

  • मुफ्त स्वास्थ्य सुविधाएं और  पति या पत्नी को बीमा कवर तथा

  •  अन्य सुविधाएं और लाभ जैसा कि सरकार द्वारा  समय-समय पर निर्धारित किया जाए

राज्य सरकार के कर्मचारियों के लिए विशेष लाभ 
  •  एक संतान होने पर सभी शैक्षणिक संस्थानों में प्रवेश में वरीयता

    • ऐसी संतान को सरकारी नौकरियों में प्राथमिकता

    • स्नातक तक मुफ्त सुविधा

    • लड़कियों हेतु  उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति


सामान्य जनता को मिलने वाले लाभ

  •  मकान खरीदने के लिए बहुत  कम ब्याज दर पर  पर सॉफ्ट लोन

  • पानी, बिजली, गृह कर और जलकर में रियायत

  • संतानों के लिए स्नातक तक मुफ्त सुविधा

  • लड़कियों हेतु  उच्च शिक्षा के लिए छात्रवृत्ति

  • गरीबी की रेखा से नीचे रहने वाले दंपति के लिए यदि वह एक बच्चे के बाद नसबंदी करा लेते हैं तो एकल   बालिका  संतान पर ₹100000 तथा एकल  बालक  संतान पर ₹80000 की प्रोत्साहन राशि


हतोत्साहन या दंडात्मक प्रावधान :

  •  दो से ज्यादा संतानों के होने पर सरकार द्वारा प्रायोजित कल्याणकारी योजनाओं से वंचित किया जाएगा

  •  राशन कार्ड की सीमा 4 लोगों तक ही निर्धारित होगी

  • स्थानीय निकाय के चुनाव में प्रत्याशी बनने पर प्रतिबंध 

  •  दो से  अधिक संतान होने पर सरकारी नौकरियों के लिए आवेदन नहीं कर सकेंगे

  •  सभी निर्वाचित प्रतिनिधियों और सरकारी कर्मचारियों को एक्ट लागू होने के 1 साल के अंदर एक अंडरटेकिंग देनी होगी कि वह 2 बच्चों के नियम का पालन करेंगे.

  •  नियम तोड़ने पर सरकारी नौकरियों में प्रोन्नति नहीं मिलेगी

  •  किसी तरह का अनुदान या सरकारी रियायत से वंचित किया जाएगा 

  • दो संतान होने के बाद भी दंपति  तीसरे बच्चे  को गोद ले सकेंगे जिसमें नियम बाधा नहीं बनेगा.

  • दोनों संतानों में से किसी एक के डिसेबिलिटी होने पर तीसरी संतान  होने पर  नियम लागू नहीं होगा.

  •  दो संतानों में से अगर किसी की मृत्यु हो जाती है तो ही तीसरी संतान के लिए यह नियम लागू नहीं होगा. 

  •  कानून  लागू होने के 1 साल के अंदर अगर  तीसरी संतान होती है तो यह नियम लागू नहीं होगा

  • सबसे अधिक आपत्तिजनक व्यवस्था बहु  पत्नी  और बहु  पति विवाह के  मामलों में की गई है, जिसमें पर्सनल ला के आधार पर बहु  पत्नी और  बहु पति  के लिए  काफी  उदार   व्यवस्था  की गई है .


 प्रस्तावित कानून के  आपत्तिजनक प्रावधान 


  1. सबसे अधिक आपत्तिजनक व्यवस्था बहु विवाह के  मामलों में की गई है जिसमें सेक्शन १९  में व्यवस्था है कि यदि किसी व्यक्ति ने, जो पर्सनल धार्मिक कानून के अंतर्गत एक से अधिक विवाह कर सकता है,  एक से अधिक विवाह किए हैं और  सभी पत्नियों के  मिला  कर  उसके दो से अधिक बच्चे हैं तो वह व्यक्ति तो इस कानून के अनुसार  सुविधाओं से वंचित होगा लेकिन उस व्यक्ति की पत्नियां अलग अलग रूप से यदि  उनमें से प्रत्येक के पास अधिकतम दो या  जुड़वा संतानों की स्थिति में  अधिकतम तीन संतानों  तक   उन्हें और उनकी संतानों को किसी लाभ से वंचित नहीं किया जाएगा.  

  2. इस तरह से यदि किसी  मुस्लिम व्यक्ति  ने चार शादियां की हैं  और उसकी चारों  पत्नियों से  8 या  जुड़वा संतान होने की विशेष परिस्थितियों में 12 बच्चे हैं,  तो वह स्वयं तो  कानून के उल्लंघन का दोषी समझा जाएगा और तदनुसार वह  सरकारी लाभ से  वंचित रहेगा  लेकिन उसकी चारों पत्नियां और बच्चे  सरकारी लाभ से वंचित नहीं होगे और न ही उनके विरुद्ध अन्य कोई कार्यवाही होगी.  इसका अर्थ यह हुआ एक मुस्लिम व्यक्ति को चार पत्नियों के साथ अगर पत्नी अलग-अलग दो या तीन संतान जैसा भी  हो का नियम मानती है तो उस परिवार पर कोई भी असर नहीं आएगा और उसे राज्य की योजनाओं का लाभ यथावत मिलता रहेगा उसके राशन कार्ड में भी कटौती नहीं की जाएगी.

  3.  धारा 19 में यह भी व्यवस्था है कि यदि कोई सरकारी कर्मचारी / जनता से कोई व्यक्ति पर्सनल ला के अंतर्गत दूसरी, तीसरी, या चौथी शादी करता है तो भी उस पर  दंडनीय  प्रावधान लागू नहीं  होंगे.  

  4.  एक और हास्यप्रद  व्यवस्था  बहुपति विवाह के संदर्भ में की गई है उसमें भी यदि किसी पत्नी  जिसके कई पति हैं और  सभी पतियों से उसके दो से अधिक संतान हैं तो  पत्नी  स्वयं तो  इस नियम के उल्लंघन की जिम्मेदार ठहरायी  जाएगी और उसे  सुविधाओं से वंचित किया जाएगा लेकिन यदि प्रत्येक पति के यदि दो से अधिक बच्चे नहीं है जुड़वा संतान के मामले में तीन से अधिक बच्चे नहीं है  तो वह इस नियम का उल्लंघन करने वाला नहीं माना जाएगा और उसे  तथा उसकी संतानों को सुविधाओं से वंचित नहीं किया जाएगा.  इसमें हास्यास्पद  यह है कि एक पत्नी से उत्पन्न होने वाली सभी संतानों में यह कैसे तय किया जाएगा कौन संतान किस पति की  है और किस  पति  से कितनी संताने हैं? 

  5.  अच्छा तो यह होता यदि  यह व्यवस्था  की जाती कि इस कानून के लागू होने के बाद यदि   कोई स्त्री दूसरी, तीसरी या चौथी  पत्नी के रूप में किसी व्यक्ति से शादी करती है तो वह  इस कानून के उल्लंघन की दोषी मानी जाएगी और तब  उसेऔर उसकी  संतानों  को सरकारी लाभ से वंचित किया जाएगा. 

  6. यही व्यवस्था  बहुपति विवाह में भी लागू की जा सकती है. 

  7. राज्य सरकार के कर्मचारियों को कानून लागू होने के 1 साल के अंदर एक अंडरटेकिंग देनी होगी कि वह  इस कानून का पालन करेंगे. 1 साल की व्यवस्था करने का मतलब है उन्हें एक  और संतान  के लिए अनुमति दे देना. 

  8.  जब सर्वोच्च न्यायालय   समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए केंद्र सरकार को  अनुस्मारक  दे रहा है और हाल  ही में  दिल्ली उच्च न्यायालय ने मीणा समुदाय के एक  तलाक के मामले में व्यवस्था दी है कि  अलग-अलग समुदाय के लिए अलग-अलग व्यवस्थाएं नहीं हो सकती  और  केंद्र सरकार को   निर्णय की कॉपी भेजते हुए समान नागरिक संहिता जल्द से जल्द लागू करने की  सलाह दी है. ऐसे समय में धार्मिक आधार पर  पर्सनल लॉ के  अनुसार छूट देकर कोई  नया कानून  बनाना तर्कसंगत और  प्रगतिशील  कदम  नहीं लगता.  

  9. प्रस्तावित कानून की धारा 5 के अंतर्गत एकल संतान पर प्रोत्साहन देना उचित प्रतीत नहीं होता.  इससे भारत में   हिंदू समुदाय में  नकारात्मक वृद्धि दर होने की संभावना है,  जिससे   विभिन्न धर्मावलंबियों के  बीच  जनसंख्या असंतुलन पैदा हो जाएगा,  जो भारत जैसे देश के लिए अत्यंत खतरनाक साबित होगा. 

    1.   चीन ने कई दशक पहले इस तरह की नीति बनाई थी जिसे  शीघ्र ही  बदल कर दो संतान में कर दिया गया  था और हाल ही में चीन ने तीन संतान की अनुमति दे दी है. 


  1.  हिंदू समुदाय में पढ़े लिखे लोग और खास तौर से नौकरी पेशे से जुड़े  लोग  पहले ही परिवार नियोजन अपनाते चले आ रहे हैं.  राज्य सरकार की कर्मचारियों के रूप में मिलने वाले प्रोत्साहन से उन्हें फायदा तो जरूर होगा लेकिन सामान्य जनता में प्रोत्साहन के लालच में  यदि दो संतान की नीति लागू हो जाती है तो विभिन्न धर्मावलंबियों के बीच जनसंख्या असंतुलन पैदा हो जाएगा. इससे सबसे अधिक नुकसान हिंदू समुदाय को होगा. 


समग्र रूप से  देखें तो उत्तर प्रदेश का  प्रस्तावित जनसंख्या विधेयक  ज्यादातर हिंदू समुदाय को ही  प्रभावित करेगा और ऐसे में जबकि मुस्लिम समुदाय की जनसंख्या बहुत तेजी से बढ़ रही है,  उन्हें पर्सनल ला के आधार पर  न केवल परिवार नियोजन से  राहत देना बल्कि बहु विवाह   को भी  अप्रत्यक्ष रूप से अनुमति प्रदान करना होगा.  यदि इनका समस्याओं का निदान मिल जाता है तो यह कानून अच्छा शाबित हो सकता है .  


अगर हम  धार्मिक आधार पर जनसंख्या असंतुलन की बात छोड़ भी दें  तो भी ऐसा लगता है  कि प्रस्तावित जनसंख्या नियंत्रण  कानून  केवल  राज्य सरकार के कर्मचारियों पर  निर्भर है,  और वह भी प्रोत्साहन और हतोत्साहित करने के माध्यम से, जिसमे  मुसलमानों तथा अन्य धर्मावलंबियों की संख्या कम है,  और  उन्हें बहु पत्नी  के रूप में पर्सनल ला के आधार पर काफी छूट दे दी गई है, जिसे प्रस्तावित कानून केवल हिंदू कर्मचारियों पर ही प्रभावी ढंग से लागू हो सकेगा जो अभी भी  सामान्यतया परिवार नियोजन का पालन करते हैं.

  

राशन कार्ड तथा अन्य  छोटे-मोटे प्रोत्साहनों के माध्यम से सामान्य जनता पर इसका व्यापक प्रभाव पड़ेगा ऐसा बिल्कुल भी नहीं लगता.  पूरे भारत में भ्रष्टाचार की ऐसी लीला है कि   अवैध घुसपैठिए  राशन कार्ड, आधार कार्ड और पासपोर्ट बड़े आसानी से बनवा लेते हैं वहां राशन कार्ड में यूनिट कम करने की योजना  प्रभावी ढंग से  काम करेगी इसकी संभावना भी संदिग्ध है. 

 

सरकार को अन्य कठोर कदमों  पर विचार करना  चाहिए और यह सुनिश्चित करना  चाहिए  कि  जनसंख्या कानून  सभी धार्मिक समूह पर समान रूप से लागू  किया जाए. सबसे बड़ी बात केंद्र सरकार को चाहिए कि बंगला देश सीमा को प्रभावी ढंग से नियंत्रित करे जहाँ से पैसे देकर घुसपैठ करना आज भी बेहद आसान बना हुआ है. नेपाल सीमा से घुपैठ करने में तो कोई रोक टोक ही नहीं है.


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- शिव मिश्रा

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