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ब्राह्मण होने का दर्द- ब्राह्मण आज के दौर का 'नया दलित' बन चुका है?
हिंदू एकता और ब्राह्मण होने का दर्द: ऐतिहासिक षड्यंत्र से वर्तमान संकट तक || क्या भारत का प्रबुद्ध वर्ग (ब्राह्मण) आज के दौर का 'नया द...
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शिव प्रकाश जी!!! कहां इन लोगों के चक्कर में हैं। विदेशों के ठाट-बाट में पढ़कर अर्थव्यवस्था का ज्ञान झाड़ते ये लोग केवल और केवल हिन्दू विरोधी मानसिकता से भरे हुए हैं। पता नहीं इनका नामकरण रघुराम या चिंबरम कैसे हो जाता है, क्योंकि ये इन नामों की संस्कृति, संस्कार और धर्म हिन्दुओं के अनुकूल तो कोई बात ही नहीं करते। जिस तथाकथित पत्रकार को हत्या होने से पहले कोई सामान्य रूप से जानता भी नहीं था, उस पर इतना बवाल!! अपशब्द कहने की इच्छा होती है ऐसे लोगों को और साथ में पीटने का मन भी करता है इन्हें। सामाजिक ज्ञान के हिसाब से तो ऐसे लोग प्राइमरी में भी पास होने के लायक नहीं है। अभी बैंकों से लेकर अनेक सरकारी कार्यालयों व प्रतिष्ठानों तथा मीडिया घरानों में वही कुबौद्धिक बीज पनप रहा है, जो कांग्रेसियों-वामियों के गठन से बोया गया था।
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