Monday, February 17, 2020

शाहीन बाग़ का झूठ : और झूठ के पीछे का सच

सबसे बड़ा झूठ
शाहीन बाग का का सबसे बड़ा झूठ है कि यह धरना, प्रदर्शन, आंदोलन संशोधित नागरिक कानून और एनआरसी के विरुद्ध है और यह मुस्लिम महिलाओं द्वारा स्वत: स्फूर्त संचालित है. इसका जेएनयू जामिया और एएमयू से कोई लेना देना नहीं है.आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का इससे दूर दूर का कोई रिश्ता नही।
शाहीन बाग का केवल झूठ जानने से स्थित स्पष्ट नहीं होती इसलिए ये भी जानिए कि इसका सच क्या है ?

शाहीन बाग का सच
शाहीन बाग का सच यह है कि इसका एकमात्र उदेश्य आम आदमी पार्टी को चुनाव में जीत सुनिश्चित करना था और इसकी पूरी योजना का खाका अरिन्द केजरीवाल को रणनीतिक सलाह देने वाले प्रशान्त किशोर ने बनाया था और इसका सञ्चालन फिरोजशाह कोटला रोड पर आप के वॉर रूम से किया जा रहा था . कांग्रेस भी मुश्लिम वोट मिलने की खुशफहमी का शिकार हुयी जबकि इसका उद्देश्य उसका वोट बैंक भी लूट कर आम आदमी पार्टी को देना था. सब कुछ बहुत योजना वद्ध तरीके से हुआ. शायद इतिहास में पहलीवार हिन्दुओं का ध्रुवीकरण रोकते हुए ,जमकर मुश्लिम धुर्वीकरण किया गया। वास्तव में ये एक नायाब प्रयोग था। प्रधानमंत्री श्री नरेंद्र मोदी का ये कहना कि ये संयोग नही प्रयोग है अक्षरसः सत्य है। आप के सभी मुस्लिम उम्मीदवार रिकार्ड मतो से जीते। उन्हें प्राप्त मतों का प्रतिशत 76% तक गया । ये अपने आप मे एक रिकॉर्ड है ।जो भी हो इस नए प्रयोग से आम आदमी पार्टी की चुनाव में शानदार जीत हुई और शाहीन बाग़ आन्दोलन की “हैप्पी इंडिंग” भी . भ्रष्टाचार के विरुद्ध जनआंदोलन से उपजी एक पार्टी ने मुफ्त खोरी या/और रिश्वत खोरी का बहुत ही ईमानदारी से उपयोग किया और संविधान और लोकतंत्र की कमजोर कड़ियों को जोड़ कर , सामाजिक ताने बाने को तोड़कर , हिंदुस्तान की आत्मा को रौंदते हुए , देश की बिषम परस्थितयों को अपने फायदे के लिए निचोड़ लिया । ये अभिनव प्रयोग है ऐसा तो कभी कांग्रेस भी नही कर सकी जिसने अमेरिका की एक एजेंसी को चुनाव सलाहकार के रूप में लगा रखा था।

(आम आदमी पार्टी की जीत के बाद शाहींन बाग़ उजड़ गया)

शाहींन बाग की प्रष्ठभूमि
राजनीतिक रणनीतिकार प्रशांत किशोर पहले भारतीय जनता पार्टी के लिए काम करते थे । 2014 में लोकसभा चुनाव में भाजपा की विजय के बाद और मोदी के प्रधानमंत्री बनने के बाद प्रशांत किशोर की सीधे-सीधे राजनीति में आकर कौशल दिखाने की लालसा जागृत हो गई । सूत्रों के अनुसार उन्होंने अपनी इस इच्छा को अमित शाह के सामने प्रकट किया और अनुरोध किया कि उन्हें भाजपा में पार्टी संगठन में कोई बड़ा पद दिया जाए । भारतीय जनता पार्टी कैडर वाली पार्टी है और प्रधानमंत्री, राष्ट्रपति ,मुख्यमंत्री ,राज्यपाल समेत कई बड़े नेता, कार्यकर्ता से यहां तक पहुंचे हैं .पार्टी में वैसे चाहे जितनी कमियां हो लेकिन एक बहुत अच्छी चीज है कि बाहर से आए हुए नेताओं को संगठन में किसी बड़े पद पर नहीं बैठाया जाता है ।पार्टी बाहर से आए नेताओं को विधानसभा, लोकसभा का टिकट तो दे सकती है उन्हें विधान परिषद और राज्यसभा भेज सकती है लेकिन संगठन में महत्वपूर्ण पद पर नहीं बैठा सकती . कहा जाता है कि श्री प्रशांत किशोर की मांग पूरी नहीं हो सकी लेकिन अमित शाह के कहने पर उन्हें जेडीयू में न केवल शामिल किया गया बल्कि उपाध्यक्ष भी बना दिया गया । प्रशांत किशोर को इससे बहुत कुछ हासिल नहीं हुआ और उनकी फर्म विभिन्न राजनीतिक पार्टियों के लिए कार्य करती रही । इस बीच भारतीय जनता पार्टी से उनके रिश्ते बिगड़ते रहे ।हाल ही में इसकी पराकाष्ठा तब हो गई जब उन्होंने पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को लोक सभा और विधानसभा चुनाव के लिए अपनी फर्म का रणनीतिक सलाह हेतु अनुबंध कर लिया । लोकसभा चुनाव में प्रशांत किशोर के अथक प्रयासों के बावजूद भी भारतीय जनता पार्टी पश्चिम बंगाल में तृणमूल कांग्रेस को सीधी टक्कर देकर 42 में से 18 सीटें जीतने में भी सफल रही । इसबीच अरविंद केजरीवाल ने भी प्रशांत किशोर को दिल्ली विधान सभा चुनाव हेतु अनुबंधित कर लिया। प्रशांत किशोर ने पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी और दिल्ली में अरविंद केजरीवाल के लिए संशोधित नागरिकता कानून और एनआरसी को जीत का थीम बना कर योजना बनाई. इस बीच CAA और NRC को लेकर प्रशान्त किशोर के सम्बन्ध भाजपा से इतने ख़राब हो गये कि अमित शाह की सिफारिस पर जेडीयू में लिए गए प्रशांत किशोर को अमित शाह की नाराजगी के बाद ही बाहर का रास्ता दिखाया गया .

(जीत की खुशी- प्रशांत किशोर और केजरीवाल )

जहां पश्चिम बंगाल में स्वयं ममता बनर्जी संशोधित नागरिकता कानून के विरोध में सड़कों पर है, वही दिल्ली में केजरीवाल को इस मुहिम से दूर रखते हुए शाहीन बाग को बहुत सोच समझ कर आन्दोलन का केंन्द्र बनाया गया । लोकसभा चुनाव में दिल्ली की सभी सातों सीटों पर जीतने वाली भाजपा को हर विधानसभा क्षेत्र में मुस्लिम महिलाओं ने जमकर वोट किए थे । जिसके पीछे तीन तलाक और हलाला खत्म करने की खुशी थी। इसलिए जानबूझकर शाहीन बाग में महिलाओं को आगे किया गया ताकि इन मुस्लिम महिलाओं को भाजपा को वोट देने से रोका जा सके और इस तरह मुस्लिमों को एकजुट करके एकमुश्त वोट आप को दिलवाया जा सके । परोक्ष रूप से आम आदमी पार्टी ने खासतौर से उसके मुस्लिम नेताओं और कुछ मुस्लिम संगठनों ने शाहीन बाग को वित्त पोषित किया । प्रदर्शनकारियों के लिए बहुत ही अच्छे खाने-पीने के इंतजाम किए गए ताकि उनको लंबे समय तक रोका जा सके । प्रदर्शनकारियों में बड़ी संख्या में दिहाड़ी मजदूर और अल्प आय वर्ग के लोग थे । कहा तो यह भी जाता है कि उन्हें प्रतिदिन के हिसाब से भुगतान किया जा रहा है . इसका नतीजा यह हुआ कि शाहीन बाग में आगे महिलाएं और पीछे एक बहुत बड़ा तंत्र या षड्यंत्र था ।आम आदमी पार्टी की जीत पर शाहीन बाग में जमकर उल्लास मनाया गया लोग एक दूसरे से गले मिले और बिरयानी बांटी गई । धीरे-धीरे कम प्रदर्शन कारी और भी कम होने लगे हैं और वित्त पोषक भी दूर हो रहे हैं . अब शाहीन बाग का आंदोलन अपने आप खत्म हो रहा है क्योंकि उद्देश्य पूरा हो चुका है। जे एन यू, जामिया, और ए एम यू भी अब शांत हो जाएंगे । पूरे घटना क्रम में कांग्रेस एक "आत्मघाती दल" के रूप में उभरा है। उन्हें भाजपा के न जीत पाने या कांग्रेस द्वारा भाजपा को रोक देने की बेहद खुशी है। राहुल, प्रियंका और सोनिया सब बेहद खुश हैं । उन्हें इस बात का जरा भी गुमान नही कि उन्होंने स्वयं कांग्रेस में आत्मघाती टाइम बंम लगा दिया है । अगर स्थिति यही रही तो कांग्रेस स्वयं कांग्रेस मुक्त भारत का सपना साकार कर देगी। कांग्रेस वहीं जीत सकती है जहां वह भाजपा के मुख्य मुकाबले में है जैसा मप्र , छत्तीसगढ़ और राजस्थान में हुआ। जहाँ कहीं भी कांग्रेस ने किसी तीसरे दल को भाजपा के सामने खड़ा कर दिया वहां कांग्रेस फिर कभी खड़ी नही हो पाई। यदि दिल्ली में कांग्रेस और आप के संयुक्त वोट प्रतिशत का औसत निकालें तो भाजपा से 8% से भी ज्यादा कम हैं । इसका मतलब ये है कि कांग्रेस अगर ठीक से चुनाव लड़ती तो भाजपा जीत जाती। ये भी निष्चित है कि कभी आप हारेगी तो जीतने वाली भाजपा होगी। कांग्रेस तो दिल्ली से सदा सर्वदा के लिए विदा हो गई।

कह सकते हैं कि शाहीन बाग आंदोलन का मुख्य मकसद मुस्लिम पुरुष और महिला वोटों को एकजुट करके आम आदमी पार्टी के खाते में डालना था ताकि अरविंद केजरीवाल की जीत सुनिश्चित की जा सके . इसमें कांग्रेस ने भी बहुत सहयोग किया । एक तरफ मणिशंकर अय्यर, शशि थरूर, दिग्विजय सिंह और सलमान खुर्शीद जैसे फायर ब्रांड नेताओं ने जहरीला माहौल बनाया और उन्हें भारतीय जनता पार्टी के विरुद्ध खड़ा किया दूसरी तरफ कांग्रेस की युवा बिग्रेड राहुल गांधी और प्रियंका वाड्रा ने पश्चिमी उत्तर प्रदेश से पूर्वी उत्तर प्रदेश तक और शाहीन बाग से इंडिया गेट व जंतर मंतर तक कानून व्यवस्था को तार-तार करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी । जेएनयू, जामिया और एएमयू भी रह रह कर रंग बदलते रहे और केंद्र सरकार को उलझाने का काम करते रहे . इतनी बड़ी पटकथा के लेखक को नमन करना चाहिये , हम लोगों को नही , कम से कम राजनीतिक लोगों को .
**************** शिव मिश्रा *****************
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